रुड़की से आगरा जनरल डिब्बे में
अगस्त माह के अंत में किसी सरकारी कार्य हेतु आगरा जाने का अवसर प्राप्त हुआ । सोमवार को कोई मीटिंग होनी थी तो सोचा कि रविवार को दिन में ही सफर किया जाय । इससे पहले आगरा 1992 में जाना हुआ था हरिद्वार से । उस समय बस से सफर किया था । इस बार सोचा कि किसी ट्रैन से जाय जाय । वैसे तो वर्तमान में बहुत सारे और भी ऑप्शन आ गए हैं आराम से सफर करने के, जैसे कि ऐसी वाली वॉल्वो बस, ऐसी वाली ट्रेन भी और साधारण बस भी । पर बचपन से ही ट्रेन से सफर करना अच्छा लगता रहा है, तो ट्रैन के ही सफर पर विचार किया गया । मित्रों ने सलाह दी कि आरक्षण करा लेना ठीक रहेगा परंतु इतने कम समय में वह भी मिलना मुश्किल ही था । सोचा कि चलो काफी समय के बाद जनरल डिब्बे में ही सफर किया जाय । सामान तो कुछ ज्यादा था भी नहीं । खैर ट्रैन काsamay wagaira पता किया, कलिंग उत्कल नामक ट्रैन सुबह 6,45 पर रुड़की से चल कर आगरा 3,30 बजे पहुँच जाती है । इसी गाडी से चलने का प्लान बनाया गया । सुबह ठीक 6,30 स्टेशन आ गया, टिकेट खिड़की पर थोड़ी भीड़ थी मैंने सोच कर कि बस में काम से कम 300 या 400 के बीच किराया लगता है तो पांच सौ का नोट टिकेट के लिए दिया, किन्तु मुझे आश्चर्य हुआ जब मैंने टिकेट पर मूल्य देखा सिर्फ 130 रूपये । सचमुच भारतीय रेलवे गरीब लोगों के लिए एक वरदान ही है । ट्रैन थोड़ाvilamb se aayi अमूमन एक्सप्रेस गाड़ियों में जनरल डिब्बे या तो सबसे आगे याsabse पीछे ही लगाये जाते हैं, मै सबसे आगे ही पहुँच गया । ट्रैन आयी कुछ लोग उतरे और मैंने डिब्बे में अपना स्थान बनाया । भीड़ तो थी ही खैर एक सिंगल सीट पर एक युवा को देखा जो शायद हरिद्वार से वापस आ रहा था उससे रिक्वेस्ट करके उसी के साथ थोड़ी से जगह में यह सोच कर बैठ गया कि हो सकता है कि अगले किसी स्टेशन पर मुझे पूरी सीट मिल ही जायेगी । किन्तु सम्भावना समाप्त से लगी जब पता चला कि वो सभी लोग धौलपुर जा रहे हैं । सामने वाली सीट पर एक बुज़ुर्ग सज्जन लेते हुए थे जो कि शायद बीमार थे । इसी बीच ट्रैन चल दी । दिल्ली से ट्रेन में भीड़ और बढ़ गयी पर उतरने वाले लोग कम ही थे । एक महिला भी चढ़ी गरीब से, कुल 04 छोटे छोटे बच्चों के साथ, पति भी साथ था शायद मजदूर थे और किसी काम की तलाश में कहीं जा रहे थे । सबसे बड़ी बेटी जो कुछ 12 साल की रही होगी अपने छोटे छोटे भाई बहनों को संभाल रही थी, और माँ बच्चों को चुप कराने की कोशिश कर रही थी भीड़ के कारण बच्चे गर्मी से भी परेशान थे । बच्चों ने बीच में खाना भी खाया परांठे बिना किसी सब्जी के । और फिर फर्श पर ही बैठ गए और ऊँघने लगे । डब्बे के यदा कदा कुछ खाने का सामान बेचने वाले भी आते जा रहे थे । और मुझे आश्चर्य हुआ कि चूँकि उनके ग्राहक जनरल डिब्बे वाले मेरे जैसे यात्री होते हैं तो उनके रेट भी बहुत कम थे, 5 रु की चाय, 10 रु के दो समोसे, 10 रु की सोने जैसे दिखने वाली चैन जिसे बेचने वाला बड़ी ही नाटकीयता वाले और कलात्मक अंदाज से बेच रहा था । ट्रैन अब दिल्ली से चल चुकी थी । एक युवा जो मेरठ से चढ़ा था तथा फ़ोन पर शायद अपनी प्रेमिका को डांट रहा था कि उसने पता नहीं किसी को अपने फोटो भेज दिए थे और व्हात्सप्प नहीं चला रही थी, युवा ने उसको डांटा की अगर वह उससे व्हात्सप्प पर चाट नहीं करेगी तो उसको भूल जाए । फरीदाबाद उतरने के लिए नीचे बैठे हुए लोगों को डांटते हुए तेजी से नीचे उतरा । ट्रैन फरीदाबाद से चल पड़ी, मुझे अभी भी पूरी सीट नहीं मिली थी तथाseat का असली मालिक उसकी सीट पर मेरे अनधिकृत अतिक्रमण से काफी तंग सा लग रहा था पूरी ताकत से मुझे हटाने की कोशिश में लगा रहा । पर मै भी जमा ही रहा यह सोच कर कि यदि में वहां से उठ गया तो कोई और बैठेगा जरूर । इसी बीच गाडी मथुरा पहुँच गयी और वहां से भी काफी लोग डब्बे में स्वर हुए / एक व्यक्ति बहुत हे दयनीय अंदाज में बैठे हुए लोगों से रिक्वेस्ट करने लगा कि उसको दोनों सीटों के बीच सिर्फ खड़ा होने दिया जाय ताकि उसको खिड़की से बहार का दिखाई देता रहे, उसको बैठने कि जगह नहीं चाहिए थी . उसके साथ एक साधू बाबा भी स्वर हुए जोंहोने बताया कि आदमी हाई ब्लड प्रेशर का मरीज है और अक्सर भीड़ में घुटन महसूस करता है / उसकी व्यथा सुनकर ऊपर सामन रखने कि जगह बैठे लोगों को दया आ गयी और उन्होंने उसके लिए अपने पास जगह बना दी. साधू बाबा मेरे सामने ही खड़े हो गए . गाडी मथुरा से चल चुकी थी और मुझे आगरा के रजा कि मंदी स्टेशन पर उतरना था. दरवाजे तक पहुँचाने के लिए भी भरी भरकम मशक्कत के जरुरत को देखते हुए मैंने साधू बाबा को अपनी सीट दी और बैग उठाकर दरवाजे कि और बढ़ने का प्रयास किया. खैर करीब आधे घंटे कि म्हणत और इन्तेजार के बाद मेरा गंतव्य आ ही गया और मई ट्रेन से नीचे उतरा.
Enter your comment...बहुत सुन्दर और मन को मोहने वाले अंदाज़ में यात्रा का सचित्र वर्णन किया सर। अब मन करता है कि एक बार अवश्य ही जनरल डिब्बे से यात्रा कर उन समस्त आनंद और वेदनाओं कर रसास्वादन अवश्य कर लिया जाय।
ReplyDeleteNice sir
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