राजकीय प्राथमिक विद्यालय त्यूणी 1 के पुनर्निमाण में बाधा

त्यूणी स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय की पुनर्निमाण की समस्या ।

वर्ष 2015  में पहली अप्रैल को  विकास खंड चकराता में कार्यभार ग्रहण करने के बाद मुझे सबसे पहले दिनांक 12 मई 15 को ट्यूनी स्थित इस विद्यालय में आने का अवसर प्राप्त हुआ । बच्चे बरामदे में बैठे हुए थे, एक कमरे को रसोई घर के रूप में उपयोग में लाया जा रहा था तथा दूसरे की छत की टीन उड़ चुकी थी, वर्ष 1964 में निर्मित इस स्कूल की दीवारों का प्लास्टर झड़ झड़ कर गिर चुका था तथा फर्श का नामोनिशान तक भी मिट चुका था ।




 शुक्र था कि स्कूल के जीर्ण शीर्ण भवन ही के पास दो अतिरिक्त कक्ष एक के ऊपर एक बनाये गए थे तथा कुछ बच्चों को उनमे बिठा कर पढ़ाया जा रहा था । उन दोनों अतिरिक्त कक्षा कक्षों की हालत भी कोई ज्यादा अच्छी नहीं थी । किन्तु काम चलाया जा रहा था । मालूम करने पर बताया गया कि विद्यालय पुनर्निमाण हेतु विभाग से दो बार पैसा आ चुका है किंतु भूमि विवाद के कारण दोनों ही बार पैसा वापस भेजना पड़ा जिसके कारण बच्चे इस खंडहर नुमा स्कूल में पढ़ने को विवश थे । अब चूंकि दो बार पैसा वापस जा चुका था तो तीसरी बार पैसा आने की उम्मीद थी । इसी बीच माह जनवरी  2019 में विद्यालय को स्वजल विभाग द्वारा शौचालय निर्माण हेतु धनराशि आवंटित की गई जो कि माह जुलाई 2019 तक भी नहीं बन पाया था ।


विद्यालय के पुराने अभिलेखों के अवलोकन से ज्ञात होता है कि ट्यूनी में वर्ष 1962 में इस प्राथमिक विद्यालय को तत्समय जिला परिषद के विद्यालय के रूप में स्वीकृत किया गया तथा शुरुआत में विद्यालय का अस्थाई संचालन वन विभाग के कक्षों में हुआ । वर्ष 1964 में ग्राम ब्रिनाद, बस्तील के निवासी स्व श्री झिगुटिया द्वारा इस विद्यालय के निर्माण हेतु ट्यूनी में अपनी भूमि दान में दी गयी तथा उन्ही के द्वारा इस विद्यालय भवन का निर्माण भी किया गया । अभिलेखों के निरीक्षण से यह भी ज्ञात हुआ कि प्राथमिक विद्यालय के ही भवन के साथ जूनियर हाई स्कूल भी संचालित होता था जो कि वर्ष 1971 में हाई स्कूल के रूप में उच्चीकृत हुआ व कालांतर में इंटर कॉलेज के रूप में उच्चीकृत होकर स्थानाभाव के कारण अन्यत्र स्थानांतरित हुआ जहां कि उसका नवीन भवन बन गया । उच्चीकृत इंटर कॉलेज द्वारा खाली किये गए भवनों को कालांतर में स्थानीय अज्ञात लोगों  गिरा दिया गया व उनकी सामग्री यथा टीन, पत्थर, लकड़ी इत्यादि भी ले ली गयी


 । विद्यालय में तैनात तत्कालीन शिक्षकों द्वारा समय समय पर तहसील, उप जिलाधिकारी व बेसिक शिक्षा अधिकारी को इसकी शिकायत भी प्रेषित की गई । विद्यालय में उपलब्ध इन विभिन्न शिकायतों के अवलोकन से ही ज्ञात होता है कि वर्ष 1986 के बाद से ही विद्यालय में किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य को दानदाता  स्व श्री झिगुटिया के उत्तराधिकारियों द्वारा करने नहीं दिया गया । कदाचित इसी समय इंटर कॉलेज यहां से अपने नवीन भवन में चला गया था और अब उनको।लगने लगा कि एक दिन यह प्राथमिक विद्यालय का भवन भी जीर्ण शीर्ण, खंडहर होकर गिर जाएगा और ये भी कहीं और चले जायेंगे और फिर वर्ष 1964 में दान दी हुई भूमि उनको वापस मिल सकेगी । चूंकि त्यूणी में आसपास के बहुत से गांव के लोग आकर निवास करते हैं तथा यहां प्राइवेट स्कूल भी खुल चुके हैं । अतः अब भूमि की कीमत भी बढ़ गयी ऐसे में अब सरकारी विद्यालय की दान दी हुई जमीन वापस लेने की कोशिश शुरू हो गयी जिसके क्रम में पुनर्निमाण का पैसा आने के बावजूद भी विद्यालय का नया भवन बन न सका ।


पैसा आया भी और वापस भी चला गया किन्तु विरोधी पक्ष द्वारा भूमि को वापस लेने हेतु कोई भी कानूनी कार्यवाही नहीं की गई, प्रतीत होता है जैसे ही विद्यालय में तैनात शिक्षकों द्वारा निर्माण के प्रयास किये जाते होंगे उनको डरा, धमका दिया जाता होगा और वो फिर चूंकि स्थानीय होने के कारण किसी भी विवाद में न पड़ने के कारण निर्माण किये जाने से बचते रहे होंगे ।


अब इस विद्यालय के पुनर्निमाण हेतु तीसरी बार धनराशि स्वीकृत होनी है । हमने माह फरवरी में ही तहसील के सहयोग से त्यूणी में ही अन्य किसी उपयुक्त स्थान पर ग्राम पंचायत की बंजर पड़ी भूमि की भी तलाश की किन्तु कोई भी उपयुक्त भूखंड उपलब्ध नहीं हो पाया ।


 इसी बीच विद्यालय की एक बालिका द्वारा मा मुख्यमंत्री जी को पत्र लिख कर विद्यालय की दशा के विषय मे अवगत भी कराया और वन विभाग के विश्राम गृह के बाहर खाली पड़ी भूमि को भी स्कूल के लिए उपयुक्त पाया गया किन्तु कदाचित एक विभाग की भूमि दूसरे विभाग को स्थानांतरित होने की प्रक्रिया काफी लंबी होने के कारण विद्यालय का संचालन इसके पुनर्निमाण होने तक या किसी अन्य सरकारी भवन के उपलब्ध होने तक  इसी स्थान पर किया जाना होगा । इसी कारण विद्यालय में शौचालय के निर्माण का कार्य 16 अगस्त 19 को प्रारम्भ कराया गया जिसको कि आज दिनांक 17 अगस्त 19 को स्व श्री झिगुटिया के उत्तराधिकारियों द्वार पुनः रोके जाने की कोशिश की गई । मौके पर उपस्थित उप शिक्षा अधिकारी द्वारा उनसे निवेदन किया गया कि कार्य को रोके जाने हेतु किसी प्रकार का स्टे आर्डर या कोई अन्य आदेश उपलब्ध कराए जाने पर ही शौचालय के निर्माण को रोका जा सकेगा ।



इस संबंध में प्रकरण की सूचना उप जिलाधिकारी, चकराता, तहसीलदार त्यूणी व थानाध्यक्ष त्यूणी को भी दी गयी है कि विद्यालय में शौचालय निर्माण में संलग्न SMC द्वारा चयनित टोली नायक श्रीमती रवीना व श्रीमती रीना के साथ ही साथ निर्माण कार्य मे लगे मजदूरों को उपयुक्त सुरक्षा प्रदान कराई जाए ताकि शीघ्र ही विद्यालय में अध्ययनरत 112 छात्र, छात्राओं हेतु शौचालय का निर्माण शीघ्र ही कर लिया जाय व भवन के पुनर्निमाण की धनराशि तीसरी बार स्वीकृत होने पर विद्यालय भवन का पुनर्निमाण भी इसी स्थान पर किया जाय ।


अनेकों कठिनाइयों के उपरांत इस विद्यालय का कार्य फरवरी 2021 में पूर्ण कर लिया गया है । चूंकि हमारा प्रयास था कि इस स्कूल को ऐसा बनाया जाय कि इस स्कूल को देख कर  और लोग भी ऐसे ही स्कूल अपने गांव में बनाएं । इस हेतु सर्वप्रथम मैंने स्वयं 11 हजार की धनराशि दान दी और अपने समस्त शिक्षकोंसे भी मदद का आह्वान किया । बहुत से साथी इस कार्य हेतु आगे आये । किसी साथी के द्वारा सीमेंट दिया गया किसी के द्वारा रेत और टाइल इत्यादि । मेरे नौसेना के मित्रों द्वारा भी इस कार्य मे मदद की गई । जिनकी सहृदयता के कारण इस स्कूल का भवन इतने अच्छे तरीके से पूर्ण हुआ तथा आज इस विद्यालत मे 160 बच्चे पढ़ रहे हैं । बच्चे अपना नया स्कूल देख कर बहुत खुश होते हैं । 

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