वर्ष 2019 के अंतिम दिन का चिंतन

वर्ष 2019 के अंतिम दिवस का चिंतन ।

[31/12 07:56] Pankaj Kumar: मैं अपने कार्यालय से शाम को वापस पैदल ही आता हूँ । एक तो 5 किलोमीटर की पैदल यात्रा हो जाती है और शाम को 5 बजे पुरोड़ी से चकराता जाने वाली अन्य सवारियों के अभाव में रूट की  कोई गाड़ी भी नहीं मिलती । बहुत से लोग पूछते हैं कि कोई गाड़ी क्यों नहीं रख लेते ?? मेरा जवाब होता है कि जिन लोगों और बच्चों के लिए मैं काम कर रहा हूँ वो सब भी पैदल ही चलते हैं । या फिर पब्लिक ट्रांसपोर्ट से ही । 🙏🏼🙏🏼

इधर 07 जनवरी 2020 को उत्तराखंड PCS परीक्षा के माध्यम से चयनित होकर नवसृजित पद उप शिक्षा अधिकारी, राजपत्रित, पूर्व ग्रेड पे 5400 अब वेतन बैंड 10, पर  इस सेवा में 5 वर्ष पूर्ण हो जाएंगे तथा पदोन्नति के अगले सोपान खंड शिक्षा अधिकारी, पूर्व ग्रेड पे 6600, वर्तमान लेवल 11 हेतु भी सेवा अर्हता के भी 05 वर्ष पूर्ण हो जाएंगे ।

इन 05 वर्षों का अधिकतम समय अन्य विभागों को यही बताने में भी गुजरा कि अब प्रत्येक विकास खंड में खंड शिक्षा अधिकारी के अतिरिक्त एक अन्य अधिकारी का भी प्रादुर्भाव हो चुका है जिस पर विकास खंड के समस्त प्रारंभिक शिक्षा कक्षा 1 से 8 के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों की जिम्मेदारी सौंपी गई है । इन 05 वर्षों में हमे भिन्न भिन्न पदनामों से बुलाया जाता रहा जैसे कि उप खंड शिक्षा अधिकारी, ABEO आदि इत्यादि ।

रोचक यह भी है कि हमारे राज्य कोषागारों के सॉफ्टवेयर में भी अभी तक हमारा सही पदनाम उप शिक्षा अधिकारी सृजित नहीं हुआ है और उनके हिसाब से मैं Deputy Basic Shiksha Adhikari हूँ ।

चूंकि PCS परीक्षा के माध्यम से चयनित होने वाले अन्य सभी पदनाम सभी के लिए  अपेक्षाकृत जाने पहचाने होते हैं यथा SDM, DySP, वित्त अधिकारी, Asst Commissioner वाणिज्य कर, BDO व और भी अन्य । पर चूंकि यह पद भी नया ही सृजित किया गया था तथा हम लोग इस पर चयनित होने वाले भी पहले ही बैच के लोग थे तो इन 05 वर्षों का समय अन्य विभागों को यही बताने में गुजर गया कि हम कौन लोग हैं और क्या करते हैं ।

खैर इस अपेक्षाकृत कम जाने पहचाने वाले पदनाम वाले पद को छोड़ कर हमारे कई साथियों ने दोबारा से PCS परीक्षा पास की और SDM, DySP व ARTO जैसे पदों पर चयनित होने में सफलता प्राप्त की और इस गुमनामी के जीवन से छुटकारा पाने में सफल रहे ।

01 अप्रैल 2020 को चकराता में  तैनाती के भी 05 वर्ष पूर्ण हो जाएंगे । जब यहां कार्यभार ग्रहण किया था तो उप शिक्षा अधिकारी कार्यालय अस्तित्व में ही नहीं आया था तथा चकराता स्थित एक बहुत पुराने जीर्ण शीर्ण से खंडहर नुमा भवन से ही काम चल रहा था, क्योंकि उप शिक्षा अधिकारी नवसृजित पद था और इस पद पर हमारे ही बैच की नियुक्ति हुई तथा प्रशिक्षण की समाप्ति पर हम सभी 65 नव नियुक्त उप शिक्षा अधिकारी 02 चरणों मे अपने अपने विकास खंडों में पहुंच गए ।

विकास खंड चकराता में मेरी नियुक्ति के समय मार्च 2015 तक विकास खंड के ही एक राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य महोदय ही अपने प्रधानाचार्य के दायित्वों के ही साथ साथ खंड शिक्षा अधिकारी व उप शिक्षा अधिकारी के भी कार्य दायित्यों का निर्वहन इसी एक कार्यालय से कर रहे थे ।

मार्च  2015 में चकराता में पूर्णकालिक खंड शिक्षा अधिकारी महोदय व फिर 01 अप्रैल 15 को उप शिक्षा अधिकारी यानी मेरे द्वारा भी कार्यभार ग्रहण कर लिया गया ।

चूंकि इस कार्यालय में पहले से ही राजकीय इंटर कॉलेज, चकराता का भी कार्यालय संचालित हो रहा था तथा शायद उस समय इस विद्यालय के ही प्रधानाचार्य महोदय खंड शिक्षा अधिकारी का भी कार्य दायित्व निर्वाहन करते रहे होंगे अतः यही फिर खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय के भी रूप में संचालित होता रहा व कालांतर में वर्ष 2012 में उप शिक्षा अधिकारी का पद सृजित होने के बाद यही उप शिक्षा अधिकारी कार्यालय के रूप में भी चलता रहा । क्योंकि पूर्णकालिक उप शिक्षा अधिकारी के रूप में 01 अप्रैल 2015 को मेरी नियुक्ति होने से पूर्व खंड शिक्षा अधिकारी व उप शिक्षा अधिकारी के कार्य दायित्वों का निर्वहन एक ही अधिकारी,  प्रधानाचार्य श्री दोहरे जी द्वारा किया जा रहा था अतः अलग से कार्यालय की आवश्यकता नहीं समझी गयी होगी ।

कार्यालय में स्थानाभाव व हमारे प्राथमिक शिक्षकों के विभिन्न अभिलेखों को सुचारू रूप से रखे जाने व स्वयं मेरे व मेरे स्टाफ के 6 अन्य कार्मिकों के बैठने हेतु कोई स्थान उपलब्ध न होने के कारण व विकास खंड में अब पूर्णकालिक 03 अधिकारी,  खंड शिक्षा अधिकारी, चकराता, प्रधानाचार्य राजकीय इंटर कॉलेज चकराता, व उप शिक्षा अधिकारी, चकराता के आ जाने से उप शिक्षा अधिकारी कार्यालय को ब्लॉक संसाधन केंद्र, चकराता में संचालित किए जाने का निर्णय लिया गया ।

चकराता विकास खंड का ब्लॉक संसाधन केंद्र पुरोड़ी नामक स्थान पर वर्ष 2004 में ही निर्मित कर दिया गया था जहां सर्व शिक्षा अभियान से संबंधित समस्त अभिलेख व प्रशिक्षण इत्यादि चलते रहे । यह भी जानना रोचक होगा कि विकास खंड चकराता का ब्लॉक संसाधन केंद्र तत्समय ऐसे स्थान पर निर्मित किया गया जो कि भौगोलिक दृष्टि से कालसी विकास खंड के क्षेत्र में स्थित है तथा इसके निकट विकास खंड चकराता का एकमात्र विद्यालय राजकीय इंटर कॉलेज, चकराता संचालित हो रहा है जिसमे मात्र कक्षा 11 व 12 ही बड़े लम्बे समय से संचालित हो रही हैं ।

पुरोड़ी चकराता से मसूरी जाने वाले सड़क मार्ग पर चकराता से 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है । जहां तक जाने के लिए स्थानीय यूटिलिटी ही मिल पाती हैं वह भी जब कि उनको पूरी सवारी मिल सकें । ऐसे में विकास खंड के किसी दूर के स्थान के किसी शिक्षक को चकराता से पुरोड़ी जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ जाता है ।

जानकर लोग बताते हैं कि चकराता क्योंकि कैंट है  तथा मिलिट्री स्टेशन होने के कारण यहां पर राज्य सरकार के वही कार्यालय चलते रहे जिनकी स्थापना या तो आज़ादी से पहले हो चुकी थी या फिर उत्तर प्रदेश राज्य के ही समय । पुराने लोग यह भी बताते हैं कि किस प्रकार उत्तर प्रदेश के दिनों में चकराता बाजार राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारियों, कार्मिकों व उनके परिवार जनों के यहीं निवास करने से भरा पूरा दिखाई देता था । अधिकतर कार्मिक चूंकि उत्तर प्रदेश के दूर दराज के जनपदों के निवासी हुआ करते थे तो साल में लंबी  छुट्टियों के ही दिनों में अपने घरों को जाते थे । बड़ी मात्रा में उनके लिए किराए हेतु कमरे भी बने हुए थे जो कि अब वर्तमान में होटलों में बदल चुके हैं और चकराता में कमरा ढूंढना वाकई एक कठिन कार्य है । संयोगवश मुझे वर्ष 2015 में जोइनिंग के ही समय किराए का एक कमरा मिल गया था जिसका किराया अब 3600 रुपये प्रति माह है ।

कालांतर में उत्तराखंड राज्य गठन व देहरादून राजधानी के रूप में विकसित होने व सड़क व यातायात के द्रुतगामी वाहनों की उपलब्धता होने, चकराता में आवासीय सुविधाओं के अभाव होने व सर्दियों व बरसात के दिनों के कठिन जीवन के कारण कर्मचारी वर्ग ने विकास नगर व देहरादून में ही परिवार के साथ रहना उचित समझा होगा ।

कैंट द्वारा अति महत्वपूर्ण समझे जाने वाले राज्य सरकार के दूसरे कार्यालयों हेतु तो भूमि उपलब्ध करा दी किन्तु शिक्षा विभाग चूंकि किसी की भी प्राथमिकता में नहीं आता अतः मुख्य चकराता में ही शिक्षा विभाग के कार्यालयों की स्थापना किये जाने के विषय मे सोचा भी नहीं गया होगा । यह भी लिखना उचित होगा कि कैंट बोर्ड द्वारा विभिन्न स्थानों पर लगाये गए सूचना पटों में भी खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय का कोई उल्लेख नहीं है ।

राजकीय इंटर कॉलेज चकराता का स्वयं का कार्यालय अभी भी विद्यालय से 05 किलोमीटर की दूरी पर चकराता में ही संचालित हो रहा है । कदाचित राजकीय इंटर कॉलेज का संचालन वर्ष 1990 तक चकराता में होने के कारण यह कार्यालय यहीं चलता रहा और कालांतर में खंड शिक्षा अधिकारी पद सृजित होने पर दोनों ही कार्यभार एक ही अधिकारी द्वारा निर्वाहन किये जाने से राजकीय इंटर कॉलेज, चकराता के पुरोड़ी स्थित अपने नवीन भवन में स्थानांतरित होने के उपरांत भी अतिथि तक उनके कार्यालय का संचालन अभी भी चकराता से ही हो रहा है ।

वर्तमान में चकराता स्थित कार्यालय खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय व राजकीय इंटर कॉलेज चकराता के ही कार्यालय के रूप में संचालित हो रहा है । विकास खंड चकराता के अन्य कार्यालय यथा, SDM कार्यालय, BDO कार्यालय, तहसील, पुलिस थाना, खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय, सामुदायिक चिकित्सा केंद्र व अन्य कार्यालय चकराता ही संचालित हो रहे हैं, कदाचित स्थानाभाव के कारण ब्लॉक संसाधन केंद्र को चकराता से अलग 5 किलोमीटर दूर पुरोड़ी ले जाया गया जहां पर अब उप शिक्षा अधिकारी कार्यालय भी संचालित किया जा रहा है ।

विकास खंड चकराता का भौगोलिक क्षेत्र बहुत ही बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है जिसे कुल 14 शैक्षिक संकुलों में बांटा गया है । इस ब्लॉक के 03 संकुलों का सुगम मार्ग विकास नगर से ही पृथक हो जाता है, संकुल कोटा तापलाद तथा लाखामंडल जाने के लिए विकास नगर से यमुनोत्री मार्ग लिया जाता है तथा संकुल क्वानु हेतु कालसी से मीनस व अताल मार्ग जो त्यूणी तक जाता है उससे ही पहुंचा जाता है । चकराता से चल कर इन संकुलों तक अपेक्षाकृत लंबे मार्ग से ही पहुंचा जा सकता है ।

अन्य 01 संकुल हाजा जाने के लिए भी चकराता तक नहीं आना पड़ता इसका मार्ग चकराता से 20 किलोमीटर पहले सहिया नामक स्थान से ही अलग हो जाता है ।

अतः पुरोड़ी स्थित उप शिक्षा अधिकारी कार्यालय से विकास खंड का निकटतम स्कूल क्वान्सी मार्ग पर डाकरा लगभग 10 से 12 किलोमीटर व सकनाइ त्यूणी मार्ग पर लगभग 12 से 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है । जबकि विकास खंड कालसी के कुछ  स्कूल लांघा पोखरी, ठाना, तुंगरा इत्यादि अपेक्षाकृत नजदीक मात्र 2 से 05 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं ।

विकास खंड के 02 संकुल मोहना व दूँगीयरा चकराता से नजदीक पड़ते हैं जिनके अधिकतम  दूरी वाले स्कूलों टावरा, मोहना संकुल की दूरी लगभग 30 किलोमीटर व घनता, दूँगीयरा की दूरी भी इतनी ही होगी या इससे अधिक । शेष समस्त विद्यालय उप शिक्षा अधिकारी कार्यालय से 30 किलोमीटर से अधिक की दूरी पर स्थित हैं जिनमे से सबसे दूरस्थ सड़क मार्ग का विद्यालय राजकीय प्राथमिक विद्यालय पट्यूड लगभग 145 किलोमीटर की दूरी पर व अन्य स्कूल चोरलानी व प्यूनल जिनका मुंधौल से पैदल मार्ग है लगभग इतने ही  किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं ।

विकास खंड के दूरस्थ भाग त्यूणी, कात्यान तक रोडवेज की बस की सर्विस उपलब्ध है किंतु यह बस प्रतिदिन एक ही फेरा लगाती है । पहली बस जो देहरादून से सुबह 5 बजे चलती है और चकराता सुबह 8.30 बजे पहुंच जाती है । यही बस चकराता से  चलकर लोखंडी, कोटि कानासर, सावदा, दारगाड होते हुए त्यूणी लगभग 12.30 बजे तक और शाम 5 बजे तक विकास खंड के दूरस्थ छोर कात्यान तक पहुंच जाती है । किंतु कात्यान से आगे के गांव में स्थित  स्कूलों तक पहुंच पाने की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं होती है । पैदल चलना ही फिर अन्य विकल्प होता है या फिर गांव गांव से सुबह 8 बजे बाजार के लिए निकलने वाली यूटिलिटी जो कि शाम को समान व जन साधारण से लदी हुई वापस गांव तक आती हैं । चकराता से त्यूणी वाया कोटि कानासर तथा कालसी से त्यूणी वाया अताल मीनस पर ही रोडवेज की सेवा उपलब्ध होती है इसके अतिरिक्त विकास खंड की 116 ग्राम पंचायतों में स्थित 216 प्राथमिक व 47 उच्च प्राथमिक स्कूलों तक।पहुंचने हेतु या तो स्वयं के वाहन से या पैदल या फिर गांव गांव की इन्ही यूटिलिटी का सहारा लेना पड़ता है ।

मैं भी समय समय पर अपने स्कूलों तक पहुंचने के लिए इन्ही रोडवेज की बस सेवा या फिर इन्ही यूटिलिटी से सफर करता हूँ । काफी लोग बोलते भी हैं कि आप एक अधिकारी हो, ऐसे क्यों पैदल चलते हो या यूटिलिटी में पीछे या छत पर सफर करते हो उनको मेरा यही उत्तर होता है कि इससे मैं आम आदमी को होने वाली दिक्कतों को नजदीक से देखता हूँ, उनसे जुड़ाव महसूस करता हूँ और सबसे अच्छा तब लगता है जब किसी पैदल रास्ते पर कोई बच्चा हमारे किसी स्कूल का मुझे पहचान कर आकर पैर छू लेता है या किसी स्थानीय व्यक्ति, खेतों में काम करते बुज़ुर्गों से दुआ सलाम हो जाती है ।  जन यातायात से आम आदमी के साथ सफर करने का अपना ही एक आनंद है और मुझे उम्मीद है कि मैं अपने बाकी बचे हुए सेवा काल मे भी ऐसे ही सफर करता रहूंगा । कभी देहरादून की भीड़ भारी सिटी बस में खड़े होकर, कभी देहरादून के विक्रम में उस जांबाज़ चौथे आदमी के रूप में जो 3 अन्य यात्रिओ के बीच फंस कर अपने ही पैरों के सहारे व विक्रम की सीट के आभासी सहारे से अपने गंतव्य तक पहुंच जाता है । कई बार देहरादून विक्रम की फ्रंट सीट मिलने पर,  रोडवेज की त्यूणी जाने वाली बस में सीट मिलने पर और यूटिलिटी में अंदर जगह मिलने पर जो खुशी होती है वह शायद अपने खुद के वाहन में सफर करने पर भी नहीं मिलती होगी । इसके अतिरिक्त 5 सीटों वाली कार में अकेले सफर करना भी संसाधनों का अपव्यय ही नजर आता है । पहाड़ों में रह कर सीट फुल होने के बाद ही चलने की आदत पड़ चुकी है ।

यह भी जानना आवश्यक होगा कि कालसी से त्यूणी के बीच के 120 किलोमीटर के मार्ग पर कोई भी पेट्रोल पंप नहीं है, कालसी के बाद अगला पेट्रोल पंप त्यूणी से भी आगे हिमाचल के पन्द्रानु नामक स्थान पर है । यद्यपि इस बीच मे दुकानों पर खुला पेट्रोल कुछ लोग बेचते हैं किंतु उनकी भी उपलब्धता निश्चित नहीं होती । बीच मे यदि कोई वाहन खराब भी हो जाता है तो मरम्मत करने वाले भी उपलब्ध नहीं हो पाते ।

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